नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का 9वां संस्करण आज सुबह 10 बजे आयोजित हुआ। करोड़ों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की मौजूदगी वाले इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह केवल परीक्षा पर चर्चा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सीखने का एक बड़ा मंच बन चुका है।
असमंजस से कैसे निकलें? पीएम का सीधा जवाब
सत्र के दौरान जब एक छात्र ने पूछा कि शिक्षक, माता-पिता और कोचिंग की अलग-अलग सलाह के बीच क्या करें, तो पीएम मोदी ने बड़ी सहजता से कहा, “सलाह सबकी लें, लेकिन अंतिम फैसला वही करें जो आपकी क्षमता और जरूरत के हिसाब से सही हो।” उनका यह मंत्र छात्रों को मानसिक दबाव से मुक्त करने वाला रहा।
टाइम मैनेजमेंट और आत्ममूल्यांकन
समय के सदुपयोग पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों को ‘टू-डू लिस्ट’ बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सोने से पहले अगले दिन की योजना बनाएं और दिन खत्म होने पर समीक्षा करें कि कौन सा काम अधूरा रहा और क्यों। पीएम के अनुसार, आत्ममूल्यांकन की यह आदत जीवन भर काम आने वाला अनुशासन विकसित करती है।
AI: खतरा नहीं, अवसर है
आधुनिक तकनीक पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र किया। उन्होंने छात्रों से कहा कि AI से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे एक मददगार दोस्त की तरह इस्तेमाल करें। हालांकि, उन्होंने आगाह भी किया कि AI को अपनी मौलिक सोच पर हावी न होने दें, बल्कि उसका उपयोग अपनी क्षमताओं को निखारने में करें।
भावुक क्षणों के साथ समापन
कार्यक्रम का अंत बेहद खास रहा। छात्रों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया और बांसुरी की मधुर तानों के बीच पीएम मोदी को अपने क्षेत्रों के खास उपहार भेंट किए। प्रधानमंत्री ने भी बच्चों के साथ हंसी-मजाक किया और उनके अनुभवों को सुना। यह सत्र केवल एक औपचारिक संवाद न रहकर, देश के भविष्य और नेतृत्व के बीच भरोसे का एक सेतु बन गया।
